असम का इतिहास और सांस्कृतिक विरासत की पूरी कहानी | History of Assam
असम का इतिहास (History of Assam in Hindi) भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और प्राचीन सभ्यता की एक रोचक कहानी है। असम अपने प्राकृतिक सौंदर्य, चाय बागानों और विविध जनजातीय संस्कृति के लिए जाना जाता है। प्राचीन समय में यह क्षेत्र कामरूप राज्य के नाम से प्रसिद्ध था और बाद में अहोम वंश ने यहाँ लंबे समय तक शासन किया, जिसने असम की संस्कृति और प्रशासन को मजबूत बनाया। मुगल काल के दौरान भी असम ने कई युद्ध देखे और अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखी। अंग्रेजों के शासनकाल में यहाँ चाय उद्योग का विकास हुआ, जिससे असम की पहचान और मजबूत हुई। इस लेख में हम असम का इतिहास सरल हिंदी में विस्तार से जानेंगे।
वर्तमान में असम की जनसंख्या कितना है
वर्तमान में असम की जनसंख्या 4 करोड़ 40 लाख के आसपास है लंबे समय तक असम की राजधानी का दर्जा शिलांग को प्राप्त था लेकिन आजादी के बाद शिलांग मेघालय की राजधानी बन गया और दिसपुर को असम की नई राजधानी का दर्जा दे दिया गया बहुत से लोग को लगता है की असम की राजधानी गुवाहाटी है गुवाहाटी असम की राजधानी तो नहीं है लेकिन इसे असम का मुंबई जरूर कह सकते हैं, असम राज्य का प्राचीन काल से ही विशेष महत्व रहा है महाभारत के दौरान किस राज्य को पराग ज्योतिष पुर के नाम से जाना जाता था, असम में तेजपुर नाम की एक जगह है जिसे सिटी आफ ब्लड भी कहा जाता है इतिहासकारों के मुताबिक इस जगह पर महाभारत काल में कई भयंकर युद्ध हुए हालांकि आज यह जगह एक पापुलर टूरिस्ट डेस्टिनेशन बन गई है आप अगर असम जाओ तो तेजपुर घूमे बिना मत लौटेगा।
आपको बता दें कि पहले असम भारत का हिस्सा नहीं हुआ करता था यह बर्मा के अंतर्गत आता था अंग्रेजों से पहले असम पर कभी किसी विदेशी ताकत ने हुकूमत नहीं की लगभग 600 सालों तक असम में आमोह साम्राज्य का शासन काल रहा मुगलों ने 17 बार असम परहमला किया लेकिन हर बार उन्हें हर का सामना करना पड़ा इसमें वीर योद्धा लच्छी बर्फपुकन का बड़ा योगदान रहा।
असम राज्य का नाम असम कैसे पड़ा
असम राज्य के नाम कैसे पड़ा यह आज तक कोई नहीं जानता कुछ इतिहासकारों का कहना है कि असम का भू भाग पर्वत पहाड़ों से घिरा हुआ असमान होने के कारण इसका नाम असम पड़ा, असम में कैसे जाने वाले कलाकार हैं जो पूरे भारत धूम मचा चुके हैं इनमें से जुबिन गर्ग अंगराग पेपोन महंता सबसे फेमस है जो किसी परिचय के मोहताज नहीं साथ ही डॉक्टर भूपेन हजारिका जी को कैसे बोल सकते हैं भले वह हमारे बीच नहीं है लेकिन हमारे दिलों में जरूर बसे हुए हैं, आज असम भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में अपना अहम योगदान प्रदान कर रहा है पूरे नॉर्थ ईस्ट में सबसे ज्यादा जीडीपी असम राज्य की है भारत मैं सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन असम में ही किया जाता है भारत के कुल 55 परसेंट चाय और दुनिया के 16% चाय का उत्पादन असम में ही होता है साथ ही आसान अपने मुगा सिल्क के लिए भी जाना जाता है जैसा कि हम आपको पहले ही बताया कि असम काफी विविधताओं वाला एक राज्य है यहां पर लगभग 61% आबादी हिंदू समुदाय की है तो वही 34% हिस्सा मुसलमान का लगभग 4% इसी धर्म को मारने वाले लोग भी असम में रहते हैं।
असम में सबसे ज्यादा कौन सी भाषा बोली जाती है
असम में सबसे ज्यादा असमिया भाषा का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इसके अलावा 55 विभिन्न प्रकार भाषण भी यहां बोली जाती है उनमें से बंगाली, बोडो, टाई, तिवा, मिसिंग, आदि मुख्य रूप है, ब्राह्मण पुत्र नदी आसाम की सबसे प्रमुख नदी है और इसे असम की लाइफ लाइन का दर्जा भी प्राप्त है असम में यह नदी एक जगह पहुंचकर 10 किलोमीटर पर पहुंच कर चौड़ा हो जाती है ब्राह्मण पुत्र नदी के बीच में ही दुनिया का सबसे बड़ा नदी पर बना आइलैंड मौजूद है जिसका नाम माजुली आईलैंड है साथ ही दुनिया का सबसे छोटा आइलैंड भी असम में ही है और उसे उमानंद कहते हैं।
दोस्तों अगर आप बेड लवर हैं तो आपको असम बहुत ही पसंद आएगी क्योंकि यहां पर आप कहीं प्रवासी पक्षियों देखने को मिलेगी जो के भारत के अन्य किस राज्य में देखने को नहीं मिलेगी।
कच्चे तेल के भंडार सबसे पहले कहां खोजे गए थे
दोस्तों भारत में सबसे पहले कच्चे तेल के भंडार असम में ही खोजे गए थे 1886 में असम के डिगबोई मैं तेल की खोज हुई और 1901 में असम में तेल रिफाइनरी का काम भी शुरू कर दिया गया और आज भी 122 साल पुराने इस तेल रिफायनिंग के जरिए तेल रिफाइं किया जाता है।
असम में मायोंम नाम की एक जगह है जो काले जादू के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है कहा जाता है कि पहले जमाने में यहां आंखों के सामने इंसान को बकरी चिड़िया बना दिया जाता था लेकिन अब काले जादू करना छोड़ दिया है अभी यहां के लोगों ने अब सिर्फ दूसरों की भलाई के लिए ही जादू क्या करते हैं और यह जगह अब एक टूरिस्ट प्लेस बन गया है और हर साल या बड़ी संख्या में लोग आते हैं।
असम के जोरहाट जिले में धकिया खोआ बरनाम घर बनी हुई है इस जगह के खास बात यह है यहां पर एक दिया सन 1528 से लेकर आज तक लगातार जल रहा है इसे कभी बुझाए नहीं गया और सबसे लंबे समय तक जेल रहने के कारण इस दिया का नाम एशिया ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है, सबसे ज्यादा मुगा सिल्क और पाठ सिर्फ का काम यहां होता है साथी असम में सराठे बड़ी नाम की एक ऐसी जगह है जहां पर बेल मेटल का बहुत बड़ा काम होता है और यहां से पूरे दुनिया के कई देशों में बेल मेटल का सामान एक्सपोर्ट किया जाता है असम के ज्यादा लोग किसी बर्तन में खाना पसंद करते हैं जो शरीर के लिए फायदेमंद भी है
असम के प्रमुख एजुकेशन यूनिवर्सिटीज
समाज पूरे नॉर्थ ईस्ट इंडिया के प्रमुख एजुकेशन हब के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब हो गया है असम में एम्स और आईआईटी की जैसे इंडिया बेस्ट एजुकेशनल यूनिवर्सिटी मौजूद है उनके अलावा गुवाहाटी यूनिवर्सिटी कॉटन यूनिवर्सिटी डिब्रूगढ़ यूनिवर्सिटी तेजपुर यूनिवर्सिटी और गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल जैसे कई प्रमुख यूनिवर्सिटीज और कॉलेज असम में खुले हुए हैं जहां पर हर साल हजारों की संख्या में बच्चे पढ़ने आते हैं।
असम की संस्कृति और परंपरा
असम अपने संस्कृति और परंपरा के लिए भी मशहूर है असम के बिहू फेस्टिवल के बारे में तो आप ने सुना ही होगा, बिहू फेस्टिवल के दौरान असम के लोग अपने पारंपरिक कपड़े पहनते हैं एक दूसरे को बधाई देते हैं और गेहू नृत्य भी करते हैं लेकिन क्या आप जानते हैं की असम में बिहू का त्यौहार साल में एक दो बार नहीं बल्कि तीन बार मनाया जाता है साथी यहां के दुर्गा पूजा होली और अंबुबाची मेला भी यहां के प्रमुख त्यौहार है।
असम के प्रमुख पर्यटन स्थल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी
असम राज्य खासतौर पर अपने मंदिरों और राष्ट्रीय उद्यानों के लिए प्रसिद्ध है, असम का सबसे फेमस मंदिर मां कामाख्या मंदिर है कामाख्या मंदिर असम की पहचान है 51 शक्ति पीठ में से एक है हर साल यहां सावन महीने में अंबु बाची मेले का आयोजन किया जाता है माना जाता है कि इस दौरान तीन दिनों के लिए मां कामाख्या देवी राजस्व वाला होती है और तीन दिनों तक किसी को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं होती है। काजी रंगा नेशनल पार्क कसम की एक और प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन है यह राष्ट्रीय उद्यान यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में भी शामिल है यहां पर आपको असम का पढ़ाई एक सिंह वाले राइनो देखने को मिलेंगे इसके अलावा मानस नेशनल पार्क और असम टेस्ट जू में भी घूमने और सफाई का आनंद ले सकते हैं, असम के शिवसागर जिले में रंग घर नाम का एक ऐतिहासिक मांन्यूमेट है इसका निर्माण आहोम किंगडम के राजा ने कराया था यहां पर कुश्ती और भैंसों की लड़ाई जैसे खेलों का आयोजन किया जाता था, असम में आपको कई जगह चाय के बागान देखने को मिल जाएंगे लेकिन इनमें सबसे सुंदर बागान देखना चाहते हैं तो आप जोरहाट और डिब्रूगढ़ जरूर जाएं जोरहाट को भारत का द कैपिटल भी कहा जाता है यहां के चाय के बागानों में से जो सुगंध आती है वह हर पर्यटक को दीवाना बना देती है।
असम की ब्राह्मण पुत्र नदी पर है भारत का सबसे लंबा ब्रिज भी बना हुआ है इस पूल को भूपेन हजारीका सेतु नाम दिया गया है जिसकी लंबाई 9.15 किलोमीटर है साथ ही कामरूप जिले में हाजो नाम की एक जगह है जो हिंदू और इस्लाम धर्म के लोगों के लिए एक प्रमुख आस्था का केंद्र है।
कसम के शहर गुवाहाटी में आप असम स्टेट म्यूजियम पेलेनोटोरियम नेहरू पार्क साइंस सेंटर जैसी अनेकों जगह घूमने के लिए जा सकते हैं।
एडवेंचर के शौकीन लोगों को भी असम अपनी और आकर्षित करता है बैगोंली गांव से नाक कटी नाम का एक पहाड़ है जहां आप चैकिंग कर सकते हैं साथ ही डीम हसाओ जिले के तुम जैंग पीक पर हाइकिंग कर सकते हैं।
असम घूमने के लिए कब जाना चाहिए
वैसे तो आप साल के किसी भी समय असम घूमने के लिए जा सकते हैं और हर मौसम मैं यहां आपको अलग-अलग सुंदरता नजर आएगी अगर आपको अलग-अलग एक्टिविटीज करनी है तो गर्मी के मौसम में असम का ट्रिप प्लान करें और अगर असम की वास्तविक सुंदरता देखना चाहते हैं तो अक्टूबर से मार्च के महीने में ही असम के ट्रीप प्लांन करें।
असम पहुंचने के लिए सबसे सबसे अच्छा साधन हवाई मार्ग और रेलवे सुविधा मौजूद है आप भारत के चाहे किसी भी कोने में ही असम तक की रेल सुविधा भी आपको आसानी से मिल जाएगी गुवाहाटी शहर से आप असम घूमने की शुरुआत कर सकते हैं
दोस्तों यह था असम और उससे जुड़े कुछ ऐसे फैक्ट्स जो इस स्टेट को सबसे अलग बनाते हैं, इसके अलावा अगले ब्लॉग में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने वाली है।
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